Miscellaneous-विविधा, Must read-अवश्य पढें, Press Release-प्रेस विज्ञप्ति - 1 Comment » - Posted on August, 21 at 2:48 pm
यदि रिलायंस द्वारा 4.2 डालर की दर से गैस बेची गयी तो पैट्रोलियम मंत्रालय को कुछ सौ करोड़ की रायल्टी अधिक मिलेगी। लेकिन सरकार की ही कंपनी एनटीपीसी को रिलायंस को हजारों करोड़ रुपए अधिक देने होंगे। यदि ऊर्जा मंत्रालय के हजारों करोड़ रुपए के लाभ और पेट्रोलियम मंत्रालय के कुछ सौ करोड़ के लाभ में चुनना हो तो स्वाभाविक रूप से ऊर्जा मंत्रालय के लाभ को चुनना चाहिए, भले ही पेट्रोलियम मंत्रालय को घाटा हो जाए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। क्यों?
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Articles-लेख, Miscellaneous-विविधा, Press Release-प्रेस विज्ञप्ति - 2 Comments » - Posted on July, 8 at 11:25 am
गंगा के उद्धार के लिए यदि सरकार गंभीर है तो उसे पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों, साधु-संतों, वैज्ञानिकों और गंगा से सरोकार रखने वालों को भी प्राधिकरण में शामिल करना चाहिए। ऐसे लोगों की संख्या प्राधिकरण में आधे से अधिक होनी चाहिए।
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Miscellaneous-विविधा - 9 Comments » - Posted on April, 4 at 11:25 pm
भारत सरकार की अमीरपरस्त और विदेशपरस्त नीतियों का सबसे ज्वलंत उदाहरण तब सामने आया जब पता चला कि देश की बहुत बड़ी पूंजी स्विट्जरलैंड और अन्य कई देशों के बैंकों में अवैध रूप से जमा है और सरकार उसे वापस भारत लाने के पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है।
गुप्त और काले धन के गढ़ के [...]
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Miscellaneous-विविधा - 3 Comments » - Posted on April, 4 at 11:21 pm
आजादी के बाद कांग्रेस ने जिस राजनीति की शुरुआत की, आज उसका फैलाव चारो ओर दिखता है। सरकार बनाने और बनवाने की दौड़ में आज जितनी भी पार्टियां हैं, सभी में कांग्रेसी कल्चर का स्पष्ट प्रभाव है। हां उसकी छटा में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है। सभी दलों में नेतृत्व के स्तर पर सहज तौर पर नए लोगों को जोड़ने और पुराने लोगों के विकल्प खड़ा करने की व्यवस्था खत्म सी हो गयी है।
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Miscellaneous-विविधा - No Comments » - Posted on April, 4 at 11:20 pm
जब हम भारतपरस्त की बात करते हैं तो हमें यह स्पष्ट तौर पर समझ लेना चाहिए कि अमेरिका में जो हो रहा है वैसा ही भारत में होने की इच्छा रखना ठीक नहीं है।
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Miscellaneous-विविधा - No Comments » - Posted on April, 4 at 11:19 pm
जब हम गरीबपरस्त की बात करते हैं तो उसमें स्वाभाविक तौर पर समाज के सबसे आखिरी पायदान पर जीवन बसर करने वालों तक लाभ पहुंचाने वाली नीतियों का निर्धारण सबसे पहले आता है। इस बात से हम सब वाकिफ हैं कि आज भारत में नीति निर्धारण का कार्य थैलीशाहों के इशारे पर हो रहा है। [...]
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Miscellaneous-विविधा - No Comments » - Posted on April, 4 at 11:17 pm
भारतपरस्त और गरीबपरस्त नीतियां आपस में पूरक हैं, उनमें कोई विरोधाभास नहीं है। इनके दायरे में आने वाली सभी बातों को इस दस्तावेज में शामिल करना संभव नहीं है, फिर भी हम कुछ खास बिंदुओं की चर्चा करना जरूरी समझते हैं। पीछे कही गई बातों के साथ-साथ हम चाहते हैं कि गरीबपरस्त और भारतपरस्त व्यवस्था [...]
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Miscellaneous-विविधा - No Comments » - Posted on April, 4 at 11:13 pm
नोटा यानी खडे उम्मीदवारों में से कोई नहीं (None of the above) के विकल्प से सर्वसाधारण से परिचय कराते हुए उन्हें यह औजार मुहैया कराया जाना चाहिए। ऐसा हो जाने पर जनभावना सही तरह से चुनाव में परिलक्षित हो सकती है।
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Miscellaneous-विविधा - No Comments » - Posted on April, 4 at 11:11 pm
यदि हमारी चुनाव प्रणाली दोषरहित हो जाए तो काफी समस्याएं अपने आप सुलझ जाएंगी। देश की राजनीति स्वत: भारतपरस्त और गरीबपरस्त होने की राह पर चल पड़ेगी, क्योंकि जनता को इसी की जरूरत है। चुनावों में अपदस्थ किए जाने के डर से कोई भी सरकार इसके विपरीत आचरण नहीं करेगी। जो भी सरकार इसके विपरीत [...]
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Miscellaneous-विविधा - 6 Comments » - Posted on March, 31 at 4:25 pm
Mr. K. N. Govindacharya is the convenor of Rashtriya Swabhiman Andolan. He was born on May 02, 1943 in the holy city of Tirupati. He moved to the most holy City of Varanasi at a very young age. Most of his education was in Varanasi. He completed his M.sc. from Banaras Hindu University in 1962. [...]
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