राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन

हमारी भूमिका

राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन की लड़ाई एक लम्बी और जटिल लड़ाई है। यह लड़ाई भारत की जनता को अपने स्तर पर स्वयं लड़नी है। राज-व्यवस्था देश के स्वभाव और जरुरत को ध्यान में रखकर सहयोग करे, इस हेतु राज-व्यवस्था संचालकों का मानस और उनकी समझ बने, राज्य का ढाँचा, तरीका, कानून और संविधान उस अंतिम आदमी के हित और हक़ के पोषण का कार्य कर सके, यह आवश्यक है। इस सबके लिए राज-व्यवस्था का क्रमेण रूपांतरण एक जरुरत है और चुनौती भी। इस चुनौती को किसी एक संगठन या व्यक्ति के दायरे में बाँधना ना तो संभव है न ही उचित। यह लड़ाई विकेन्द्रित लड़ाई होगी। जनता ही इस लड़ाई का नेतृत्व करेगी जिसकी शुरुआत स्थानीय स्तर पर किसी भी अथवा सभी व्यक्तियों द्वारा की जानी चाहिये। सामाजिक रूप से सक्रिय लोग इस लड़ाई को केवल दिशा देने का कार्य करेंगे। राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन की भूमिका को इसी परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिये।