राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन

हमारा अधिष्ठान

व्यवस्था परिवर्तन से हम चाहते है- प्रत्येक व्यक्ति को मेहनत की रोटी और इज्जत की जिंदगी सुलभ हो तथा हमारा भारत विश्व में गौरवशाली पद पर प्रतिष्ठित हो। हमें यहीं नहीं रुकना है, हमे दुनिया को कुछ देने का भी सामर्थ्य पाना है। इसके लिये हमें भारतीय जीवन दृष्टि पर आधारित विकास मार्ग अपनाना होगा। विगत 500 वर्षो से चले आये प्रकृति के शोषण पर आधारित मानव केन्द्रित विकास के स्थान पर प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर विकास का रास्ता अपनाना होगा। प्रकृति के साथ संतुलन भी पश्चिम के एकांगी भौतिक विकास से प्राप्त समृद्धि में संभव नहीं। इसके लिये समृद्धि और संस्कृति के समन्वित संवर्धन से प्राप्त समग्र विकास ही रास्ता है। यह समग्र विकास ही हमारे व्यवस्था परिवर्तन का अधिष्ठान रहेगा।

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