राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन

के. एन. गोविन्दाचार्य जी का जन्म १९४३ में पवित्र नगरी तिरुपति में हुआ था। कुछ समय बाद उनके माता-पिता वाराणसी आ गए। यही उनकी औपचारिक शिक्षा-दीक्षा हुई। १९६२ में उन्होंने BHU से M.Sc. किया। छात्र जीवन से ही वे संघ के कार्यों में काफी सक्रिय रहे। १९६५ में उन्होंने अपना पूरा समय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को देने का निश्चय किया और प्रचारक के तौर पर उससे जुड़ गए। १९७४ में जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था।

संघ की तरफ से गोविन्दाचार्य जी ने जे.पी. आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। १९७६ में उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् मे भेज दिया गया। १९८८ में संघ की ओर से उन्हें भारतीय जनता पार्टी में काम करने के लिया भेजा गया। २००० में गोविन्दाचार्य जी ने वैश्वीकरण के प्रभावों को गहराई से समझने के लिए अध्ययन अवकाश लिया। अध्ययन के बाद वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में राज्य ही एकमात्र प्रभावी ताक़त नही है।

देश के विकास में सामजिक और सांस्कृतिक विरासत की भी अहम् भूमिका है। चंहुमुखी विकास के लिए रचनात्मक, बौद्धिक, आंदोलनात्मक, क़ानूनी आदि मोर्चों पर काम करना होगा। इस विश्वास के साथ गोविन्दाचार्य जी सत्ता की राजनीति से दूर रहकर राष्ट्र के कार्य में जुटे हैं।

श्री के. एन. गोविन्दाचार्य

संस्थापक एवं सरंक्षक

” समाजवाद हो या पूंजीवाद, ये दोनों रास्ते भारत के नही हो सकते। इसका अर्थ ऐसा नही है कि मै दुनिया
के दूसरे देशों के लिएभी पूंजीवाद या समाजवाद को गलत ठहरा रहा हूँ। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि व्यवस्था के हिसाब से देश बनाने की जगह देश के हिसाब से व्यवस्था बनानी चाहिये। “