राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन

संगठन गुणधर्म एवं विशेषता

उपर्युक्त सब सूत्रों के आधार पर हमें एक ऐसा संगठन खड़ा करना है जिसमें-

1. एक राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर की कार्यसमिति कार्य और स्वरुप की दृष्टि से ऐसी हो कि वे जिला स्तर के संगठन को आपस में गूँथने का काम कर सकै।

2. हमारा संगठन जिला इकाई आधारित होगा। कार्य की गुरुता और चुनौतियों को देखते हुए हमें हर जिले में स्थानीय सक्षम नेतृत्व उभारना होगा।

3. जिला स्तर पर नेतृत्व के उभार का रास्ता होगा साहस, पहल और प्रयोग। धीरे-धीरे जिलों से उभरा नेतृत्व ही प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित होगा।

4. तत्काल हमें न्यूनतम ढाँचा खड़ा करना है जो व्यवस्था परिवर्तन का चुम्बकीय केन्द्र बन सके। साथ में अन्य परिवर्तनकारी संगठनों से संवाद, सहमति और सहकार्य का काम भी करते चलना होगा।

5. सभी कार्यकताओं में लक्ष्य और कार्यपद्धति के विषय स्पष्टता के लिये सघन बैठक-प्रवास प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन करना होगा।

6. लक्ष्य प्राप्ति के लिये हमारे संगठन की आम जनता के बीच उपस्थिति दर्ज करने से लेकर प्रबल जनसमर्थन प्राप्त करने तक रास्ता तय करना होगा। यह रास्ता बनेगा आंदोलनात्मक गतिविधियों से। हमारे लक्ष्य के अनुकूल तथा आम जनता से जुड़े मुद्दों पर राष्टीय, प्रांतीय तथा जिला स्तर पर आन्दोलन चलाने होंगे।

7. अन्य संगठनों से संवाद कायम करने तथा उनका विश्वास प्राप्त करने के लिये उनके द्वारा चलाये जाने वाले आंदोलनों में हिस्सा लेना श्रेयस्कर है।

यदि हमने यथाशीघ्र व्यवस्था परिर्वतन का प्राथमिक खाका तैयार कर लिया और उपर्युक्त तरीके से संगठन विस्तार करने लगे तो लक्ष्य प्राप्ति में शीघ्र सफल होगे।