राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन

लक्ष्यपूर्ति हेतु न्यूनतम संगठन

व्यवस्था परिवर्तन का मूर्त खाका बन जाने से ही हम सफल नहीं हो जायेंगे। लोकतंत्र युगानुकूल राज व्यवस्था है और उसमें किसी भी महान परिवर्तन के लिए प्रबल जनसमर्थन तथा जनस्वीकार्यता की आवश्यकता है। अत: हमारे लक्ष्य की सफलता के लिए हमें भी प्रबल जन समर्थन जुटाना होगा तथा हमें जन-जन तक पहुंचना होगा। जन-जन तक पहुँचने का महत्वपूर्ण साधन है- संगठन। अत : व्यापक जनसमर्थन के लिए हमें देशव्यापी न्यूनतम संगठन खड़ा करना होगा। वैश्वीकरण के नाम पर अपनायी जा

रही नीतियों ने सारा परिदृश्य बदल दिया है। वर्तमान व्यवस्था की खामियों के कारण देश की जनता त्रस्त है। अँधा-धुंध वैश्वीकरण के कारण देश की आर्थिक आजादी भी खतरे में है। अपना अभिनव संगठन खड़ा करने के लिये हमें निम्नलिखित सूत्र मिले है-

1. युग बदल चुका है अत: अब नये तरीके, नये लड़ाके और नये औजार गढ़ने होंगे
2. संगठन में नया नेतृत्व, साहस, पहल और प्रयोग से उभरेगा।
3. अन्य संगठनों को साथ लेने के लिए संवाद, सहमति और सहकार्य का रास्ता अपनाना होगा।
4. वैश्वीकरण का हथियार केन्द्रीकरण है। इससे उत्पन्न दैत्यों से निपटने के लिए हमें विकेन्द्रीकरण का रास्ता अपनाना होगा
5. संगठन के लिये व्यक्ति-निर्माण के रास्ते के साथ-साथ और भी उपाय अपनाने होंगे। समाज में अच्छी नीयत और अच्छी क्षमता वाली प्रचंड सज्जन-शक्ति क्रियाशील है। उनमें से कुछ को छोड़कर न्यूनतम ढाँचा खड़ा करना है।